1. विद्युत विभव को परिभाषित करें? यह सदिश राशि है या अदिश राशि है ?
उत्तर:- विद्युत क्षेत्र के अंदर एकांक धन आवेश को अनंत से किसी बिंदु तक लाने में किया गया कार्य को विद्युत विभव कहते हैं
# यह अदिश राशि है
2. विभवांतर क्या है? इसका एस आई मात्रक लिखिए|
उत्तर:- विद्युत क्षेत्र के अंदर एकांक धन आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक लाने में किया गया कार्य को विभांतर कहते हैं |
# इसका एस आई मात्रक वोल्ट हो है |
3 समविभव पृष्ठ क्या है? इस के किन्हीं पांच गुणों को लिखें |
उत्तर :- वह पृष्ठके प्रत्येक बिंदु पर विद्युत विभव का मान सम्मान हो तो उसे समविभव पृष्ठ कहते हैं
# किसी भी सुचालक धातु का पृष्ठ सदैव एक समविभव पृष्ठ होता है
# समविभव पृष्ठ का गुण -
(i ) समविभव पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर विभव का मान सम्मान होता है
(ii ) बिंदु आवेश के कारण समविभव पृष्ठ गोलिय होता है
(iii )विद्युत क्षेत्र समविभव पृष्ठ के लंबवत होता है
(iv)समविभव पृष्ठ कभी भी एक दूसरे को नहीं काटते हैं अन्यथा एक ही स्थान पर विभव के दो मान हो जाएंगे जो संभव नहीं है।
(v ) समविभव पृष्ठ के दो बिंदुओं के बीच का विभवातर शून्य होता है।
4. परावैद्युत क्या है? यह कितने प्रकार के होते हैं प्रत्येक को परिभाषित करें।
उतर:- परावैद्युत- वे कुचालक पदार्थ जिन्हे विद्युत क्षेत्र में रखने पर ध्रुवित हो जाते हैं उन्हें परावैद्युत कहते हैं
अथवा
वह पदार्थ जो विद्युत धारा का चालन नहीं करता है परंतु विद्युतीय प्रभाव का चालन करते हैं उन्हें परावैद्युत कहते हैं
# परावैद्युत दो प्रकार के होते हैं-
(i ) ध्रुवीय परावैद्युत:- वे पदार्थ जिनके अणुओं के धन आवेशों का केंद्र तथा ऋण आवासों का केंद्र संपाती नहीं होता है उन्हें ध्रुवीय परावैद्युत कहते हैं
नोट:- जब किसी ध्रुवीय परावैद्युत को बाह्य विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है तब प्रत्येक अणु पर बल आघूर्ण आरोपित होता है जो उसे बाह्य विद्युत क्षेत्र की दिशा में संरक्षित करने का प्रयास करता है
जैसे-जैसे विद्युत क्षेत्र की तीव्रता बढ़ती है अधिक से अधिक अनु द्विध्रुव बाह्य द्विध्रुव क्षेत्र की दिशा में संरक्षित होने लगते हैं इसे परावैद्युत ध्रुवन कहते हैं
(ii ) अध्रुवीय परावैद्युत वह पदार्थ जिनके अणुओं के धन आवेशों का केंद्र तथा ऋण आवेश ओं का केंद्र संपाती होता है उन्हें अध्रुवीय परावैद्युत कहते हैं
नोट :- जब अध्रुवीय परावैद्युत को बाह्य विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है तो धन आवेश का केंद्र विद्युत क्षेत्र की दिशा में तथा ऋण आवेश का केंद्र विद्युत क्षेत्र की दिशा के विपरीत थोड़ा सा विस्थापित हो जाता है जिससे प्रत्येक अनु में कुछ द्विध्रुव आघूर्ण प्रेरित हो जाता है
5. संधारित्र क्या है? इसके उपयोग बताएं |
उत्तर:- संधारित्र ऐसा युक्ति जो विद्युत ऊर्जा को विद्युत आवेश के रूप में संचित करके रखता है उसे संधारित्र कहते हैं
अथवा
ऐसा युक्ति जिसके द्वारा किसी चालक के आकार या आयतन में बिना परिवर्तन किए उसकी विद्युत धारिता बढ़ाई जा सकती है उसे संधारित्र कहते हैं
# संधारित्र का उपयोग-
( i ) इसका उपयोग विद्युत आवेश और विद्युत ऊर्जा को स्टोर करने में होता है |
(ii ) इसका उपयोग विद्युत उपकरणों में चिंगारी को दूर करने में होता है
(iii ) इसका उपयोग पावर सप्लाई में वोल्टता अधिक या कम करने में होता है
(iv ) इसका उपयोग संकेतों के संचरण में होता है
6. विद्युत धारिता से क्या अभिप्राय है? इसका ऐसा ही मात्रक बताएं |
उतर :- विद्युत धारिता किसी चालक द्वारा आवेश ग्रहण करने की क्षमता को विद्युत धारिता कहते हैं इसे c द्वारा सूचित किया जाता है
# इसका s.i. मात्रक फैराड होता है
7 . किसी समांतर पट संधारित्र की धारिता किन कारकों पर निर्भर करती है
उत्तर:- किसी संधारित्र की धारिता निम्न बातों पर निर्भर करती है-
( i) प्लेटो के क्षेत्रफल पर: - प्रयोगों के आधार पर यह पाया गया है कि किसी संधारित्र की धारिता उनकी प्लेटों के प्रभावी क्षेत्रफल के समानुपाती होता है
( ii)प्लेटो के बीच की दूरी पर: - यदि संधारित्र की प्लेटों के बीच की दूरी को बढ़ाया जाता है तो संधारित्र की धारिता का मान घट जाता है यह पाया गया है कि संधारित्र की धारिता उसके प्लेटों के बीच की दूरी के व्युत्क्र - मानुपाती होता है
(iii ) प्लेटो के बीच माध्यम की प्रकृति पर: - यह देखा गया है कि यदि संधारित्र की प्लेटों के बीच का स्थान किसी कुचालक पदार्थ जैसे अभ्रक पैराफिन मोम तेल आदि से भर दिया जाए तो संधारित्र की धारिता बढ़ जाती है यदि प्लेटों के बीच की दूरी को स्थिर रखा जाए अतः संधारित्र की धारिता का मान प्लेटों के बीच रखे परावैद्युत पदार्थ के परावैद्युतांक पर निर्भर करती है
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